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संगठन कर्ता,संगठन को उसी दृष्टि से देखता है,जिस दृष्टि से संगठन की नीव डाली गई थी

बिहार मुजफ्फरपुर 
राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ से बाल्यकाल से जुड़े होने के कारण भाजपा के बनने और बढ़ने में हर पल सहभागी और गवाह रहा हूं।
भारतीय मजदूर संघ ,स्वदेशी जागरण मंच,विद्या भारती में रह कर कार्य किया।विद्यार्थी परिषद और भारत विकास परिषद के सहयोगी के रूप में भी कार्य किया।
भाजपा जब शून्य पर थी तो  आल इंडिया ग्रामीण बैंक वर्कर्स ऑर्गेनाइजेशन के जोनल सेक्रेटरी के रूप में तत्कालीन कांग्रेस सरकार के खिलाफ जनचेतना यात्रा जो 26/12/1995 को सिलचर से चलकर पूरा असम,पश्चिम बंगाल, ओरिसा,झारखंड(अब का),बिहार,उत्तर प्रदेश होकर दिल्ली  जंतर मंतर पर 25/02/1996 को पहुंची थी।इसी प्रकार की अन्य तीन यात्राएं कन्या कुमारी, भुज,और जम्मू से चल कर जंतर मंतर पहुंची थी।जहा मान्यवर मुरली मनोहर जोशी और स्वर्गीय दत्तो पंत ठेंगड़ी जी के द्वारा मुझे सम्मानित भी किया गया था।इसलिए संगठन को देखने का नजरिया मेरा वही होगा।
दिनांक 06/07/2024 को सांसद और केंद्रीय राज्य मंत्री  डॉक्टर राजभूषण चौधरी के भाजपा जिला समिति द्वारा बुलाई गई स्वागत समारोह में  भाजपा,मुजफ्फरपुर को मुजफ्फरपुर वाणिज्य परिषद  में विलय होते देख रहा हूं।यदि विश्वास नहीं हो फोटोग्राफ का निरीक्षण कर सकते है।

संसदीय चुनाव में भाजपा उम्मीदवार की विजय जरूर हो गई है,पर  विधानसभा के उम्मीदवारों  में सभी दावेदार एक दूसरे की टांग खिंचाई करते नजर आए।जीत के बाद भाजपा पुनः ग्रुप और टुकड़ों में बंटती नजर आ रही है।सभी सक्षम चुप्पी लगाए हुए है और सभी अक्षम राजनीति की तुरपाई खोज रहे है।
एक बार फिर से जातिगत खेमा बंदी,नए उम्मीदवारी लिए कुछ राजनेता बनने की चाहत वाले अपने अपने ग्रुप के लामबंदी में जुट गए है।
वैसे अब चुनाव का स्वरूप,सिद्धांत और आचरण सभी बदल गए है।
पहले समाज सेवा में नेता की उपलब्धता,सहज _सरल  होना,शारीरिक _ मानसिक सहयोग,आत्मबल बढ़ाना, आपसी सहमति _सद्भाव बढ़ाना,बीमारी _ आपदा में सहयोग करना होता था।
अब बदले स्वरूप में सरकारी सहयोग जैसे अगलग्गी,दुर्घटना में मृत्यु, बाढ़, सुखार,बीमारी सभी में सरकारी चेक  दिलवाने तक ही सीमित रहता है।वो भी चेक का भुगतान यदि दलालों और घुस का सहारा न लिया जाए तो भुगतान संभव नहीं होता है।
पहले सांसद,विधायक या पंचायत में कोई सरकारी राशि विकास के नाम पर नही आती थी।जब से आने लगी,तो वैसे सड़क को पहले बनाया जहां आवागमन कम था।
जो पूल और सड़के बनी वह एक वर्ष से अधिक नही चला।एक ही सड़क बार बार बनती रही,जिसके कारण लोगो का घर सड़क से नीचे हो गया।पूल पुलिया,कल्वर्ट का हाल प्रति दिन समाचार पत्रों में आ ही रहा है।
उम्मीदवारी तो सिर्फ मुजफ्फरपुर विधान सभा में भाजपा के अंदर एक दर्जन लोगो की है,लेकिन उम्मीदवारी का आधार कार्य नही जाति,राजनीति और आर्थिक वर्चस्व है।
जनता,सड़क,शहर तो स्मार्ट नही बने पर नेता सभी स्मार्ट जरूर हो गए है।
औराई, गायघाट के जनता की सुधि किसी ने नहीं लिया।लोग घरों से नही निकल पा रहे है।

पर ध्यान रहे जनता  इसबार  वैसे नेताओ को जरूर सबक सिखाएगी  जो जनता के नजरो में खड़ा नहीं उतरेंगे।
सुनील कुमार

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